NATO Full Form in Hindi | NATO का फुल फॉर्म क्या होता है ?

What is NATO Full Form in Hindi in this post. What is NATO meaning? Understand what is NATO.

NATO का Full Form क्या होता है ?

 

NATO Full Form North Atlantic Treaty Organization

NATO का फुल फॉर्म North Atlantic Treaty Organization होता है। NATO को हिंदी में उत्तरी अटलाण्टिक सन्धि संगठन कहते है।

NATO Full Form in Hindi

What is NATO Full Form? NATO क्या है?

NATO एक एक सैन्य गठबन्धन है, जिसमे 28 देशों का सैन्य शक्ति और राजनीतिक का गठबंधन है। विश्व युद्ध कि घटना के बाद पूरा विश्व यही चाहता था कि दोबारा वैसी घटना ना हो इसलिए कई देशो ने मिलकर संयुक्त राष्ट्र संघ कि स्थापना कि थी। इसे और शक्तिशाली बनाने के लिए सैन्य गठबन्धन बनाया गया था।

NATO Full Form = North Atlantic Treaty Organization

जिसका मुख्य उद्देश्य सभी सदस्य राष्ट्रों की स्वतंत्रता और सुरक्षा की रक्षा के लिए संगठन का गठन किया गया था। इसमे कई देशो कि सेना मिलकर सैन्य करवाई को अंजाम देंगे। जिसका नाम NATO पड़ा था।

NATO Full Form in Hindi

When was NATO established? NATO कि स्थापना कब हुई थी ?

NATO कि स्थापना 4 अप्रैल 1949 को हुआ था। जिसका मुख्य उद्देश्य सामूहिक रक्षा करना है। इसका का मुख्यालय बेल्जियम के ब्रुसेल्स में स्थित है।

अगर किसी भी एक देश पर हमला होता है तो माना जायेगा कि सभी नाटो संगठन पर हुआ है। और सभी देशो को मिलकर हमला करना है। लेकिन नाटो का संगठन में शामिल होने के लिए यूरोपियन देश से होना जरुरी था। NATO का पहला महासचिव लॉर्ड इश्मे को बनाया गया था।

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What is the purpose of establishing NATO Full Form? NATO की स्थापना का उद्देश्य क्या है ?

द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद दुनिया को बहुत ही क्षति उधानी पड़ी थी। जिसमे सोवियत संघ ने अपनी सेना पूर्वी यूरोप से हटाने को मन कर दिया था। और वह पर साम्यवादी की शासन की स्थापना करने की कोशिश की थी। जिसका अमेरिका ने पूरा विरोध किया। और इसी साम्यवादी शासन का भय दिखाकर यूरोपीय देशों को एकजुटता रखने की कोशिश में एक ऐसे संगठन का निर्माण करने को कहाँ जिससे आपस में किसी भी देश पर कोई हमला करे तो उसका मुकावला सभी संघटन देश मिलकर करे। इस नाटो संघटन की स्थापना में अमेरिका ने खुलकर मदद किया था।

What is the history of NATO Full Form? NATO का इतिहास क्या है ?

विश्व में द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद दो महाशक्ति देश उभर कर आया था। जिसमे एक सोवियत संघ और दूसरा अमेरिका था।
दोनों देशो के बिच शीत युद्ध की स्थिति बन गई थी। सोवियत संघ के साम्यवादी प्रसार को रोकने के लिए अमेरिका ने अपनी चल चली। तो सोवियत संघ ने 1948 में अंतर्राष्ट्रीय संधियों का उल्लंघन कर बर्लिन को चारो तरफ से धेर लिया था।

इसी परिस्थिति के तहत नाटो की स्थापना हुआ जिस संघटन में अपना सेना हो और किसी भी मुकावला में मिलकर रक्षा करे।
सामूहिक सैनिक सहायता और आर्थिक उद्देश्य से 1948 बेल्जियम, नीदरलैण्ड, ब्रिटेन, फ्रांस, लक्सेमबर्ग ने बूसेल्स की सन्धि पर हस्ताक्षर हुआ। और साथ में इस बात पर भी जोर दिया गया की किसी पर भी हमला हुआ तो हम सब मिलकर साथ देंगे।

NATO की स्थापना के समय 1948 के समय में 12 देशो फ्रांस, नीदरलैंड, कनाडा, डेनमार्क, आइसलैण्ड, इटली, बेल्जियम, लक्जमर्ग, ब्रिटेन, नार्वे, पुर्तगाल और संयुक्त राज्य अमेरिका ने संधि पर हस्ताक्षर किये थे। इसके बाद यूनान, टर्की, पश्चिम जर्मनी, स्पेन भी नाटो के सदस्य बने थे। 1999 में पोलैण्ड, हंगरी, और चेक गणराज्य भी नाटो का सदस्य बन गया जिसके बाद इसकी संख्या 19 हो गई थी।

फिर 2004 में 7 राष्ट्रों ने भी नाटो की सदस्यता ग्रहण किया और इसकी संख्या 26 हो गई थी। अल्बानिया और क्रोएशिया को 1 अप्रैल 2009 को सदस्यता ग्रहण हुआ और इसकी संख्या 28 हो गई।

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What is the role of NATO Full Form? नाटो की भूमिका किस प्रकार है ?

1. नाटो की भूमिका को उसके प्रवधानों के आधार पर समझा जाता है ! राष्ट्र में सदस्य के देशो की विरासत और स्वतंत्रता संधि के प्रारम्भ में ही वहाँ पर रहने वाले लोगों की सभ्यता, व्यक्तिगत स्वतंत्रता एवं कानून के शासन की सुरक्षा की जिम्मेदारी लेना है ! एक दूसरे का सहयोग करना राष्ट्र का कर्तव्य होता है ! यही तरीका है कि संधि एक सहयोग संधि का रुप है !

2. नाटो को सोवियत संघ ने साम्राज्यवादी देशों के सैनिक संगठन का नाम दिया और उसे साम्यवाद का विरोधी स्वरूप घोषित कर दिया

3. संधि प्रवधानों के आधार पर संधि के किसी भी देश पर आक्रमण की परिस्थिति में सभी हस्ताक्षरकर्ता देशों पर आक्रमण माना जाता है ! संधि कर्ताओ के सभी राष्ट्र एकजुट होकर सैनिक कार्यवाही के बीच एकत्रित होकर सभी प्रकार की स्थिति का डट कर मुकाबला करेंगे। उस संधि का स्वरूप सदस्य के देशों को पूरी तरह से सुरक्षा प्रदान करने वाला है।

NATO Full Form का क्या प्रभाव है ?

1. पश्चिमी यूरोप की सुरक्षा को लेकर बनाए गए नाटो संगठन ने पश्चिमी यूरोप को बल प्रदान किया। इसने अपने सदस्यों के बीच पूर्ण रूप से सहयोग की स्थापना हुई !

2. दूसरे महायुद्ध से यूरोपीय देशों को सैन्य सुरक्षा का प्रोत्साहन देकर अमेरिका ने दोनों देशों को सुरक्षा के क्षेत्र में अपना सहयोग प्रदान किया जिसके कारण वह बेखौफ होकर अपने आर्थिक विकास कार्यक्रम पूरा किया !

3. नाटो के गठन से शीतयुद्ध का आरम्भ हुआ। सोवियत संघ ने इसे साम्यवाद का विरोधी पाया और पूर्वी यूरोपीय देशों में अपना प्रभाव जमाने का प्रयास किया।

4. यूरोप में अमेरिका के हस्तक्षेप करने से यूरोपीय देशों के लोगो को यह सोचने के लिए मजबूर कर दिया कि यूरोप की सामाजिक एवं आर्थिक समस्याओं को यूरोपीय दृष्टिकोण से हल किया जायेगा। इसी कारण से यूरोपीय समुदाय का गठन हुआ !

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नाटों का मुख्यालय चार भागो में विभाजित किया गया है :-

1. Council (परिषद) :- इसे नाटों का सर्वोच्च अंग माना जाता है। इसका निर्माण राज्य के मंत्रियों द्वारा किया गया है। इसकी बैठक साल में एक बार की जाती है। परिषद् का उत्तरायित्व समझौते की धाराओं को लागू करता है।

2. Sub-Council (उप परिषद्) :- यह परिषद् नाटों के सदस्य के देशों द्वारा नियुक्त कूटनीतिक के प्रतिनिधियों की परिषद् होता है। वह नाटो के संगठन से सम्बद्ध सामान्य हित वाले विषयों पर विचार करता हैं।

3. Soldier Committee (सैनिक समिति) :- इसका काम नाटों परिषद् और उसकी प्रतिरक्षा समिति को सलाह देना होता है। इसमें सदस्य देशों के सेना के अध्यक्ष शामिल किये जाते हैं !

4. Defense Committee (प्रतिरक्षा समिति) :- इसमें नाटों के सदस्य देशों के प्रतिरक्षा मंत्री भी शामिल किये जाते हैं। इसका प्रमुख काम प्रतिरक्षा, रणनीतियों और नाटों, गैर नाटों देशों में सैन्य संबंधी बातो पर विचार करना होता है।

 

» जब खाड़ी युद्ध 1991 में हुआ तो उस दौरान अल्बानिया को नोटो को नागरिक एवं सैन्य सहायता दी गई।

» सामूहिक सुरक्षा के नेतृत्व में नाटो की महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसमें आंतकवाद से निपटने और मानवता के लिए खतरा बने देशों से सुरक्षा की बात की ! 2002 के शिखर सम्मेलन के दौरान नाटों के कार्यवाही बल के गठन का प्रस्ताव रखा ताकि आतंकवादी हमले और अन्य राज्यों की गतविधियों को संतुलित किया जा सके।

» नाटो की सदस्यता में विचार कर और पूर्व के प्रतिपक्षी गुटों में शामिल देशों के साथ कोई भेदभाव नहीं हुआ।1991 में मिसौरी सम्मेलन में तीन राष्ट्रों जैसे पोलैण्ड, हंगरी और गणराज्य को सदस्यता दी गई। इस कारण सदस्य की संख्या 19 के करीब हो गई और ये तीनों ही शीतयुद्ध में Estonia, Lithuania, Latvia, Sloveniaऔर सदस्यों की संख्या बढ़कर 26 हो गयी।अब पूर्वी यूरोप के देश भी नाटो में शामिल हो गये और यूरोप के एकीकरण मजबूत हुआ !

» शुरुआत में रूस ने नाटों के विस्तार पर अपनी चिंता व्यक्त की परन्तु बदलती हुई अंतर्राष्ट्रीय परिस्थिति को देखते हुए नाटों सदस्य देशों के साथ पारस्परिक सहयोग के लिये रूस को अपने अंतर्गत लाने की बात की है।

संयुक्त राष्ट्रसंघ के महासचिव ने नाटों के बारे में सकारात्मक पक्षों पर जोर दिया इस कारण राजनीतिक और आर्थिक संबंधों को प्रबलता प्रदान कर उसके सहयोग को बढ़ावा मिला।

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अमेरिका ने शीत युद्ध के वक़्त सोवियत संघ के विस्तार को रोकने के लिए एक प्रस्ताव रखा। इसे ट्रूमैन सिद्धांत का नाम दिया गया। इसका उद्देश्य सोवियत संघ के विस्तार रोकने के साथ ही साथ सभी यूरोपीय देशों की मदद करना था। यह सिद्धांत अमेरिका ने सभी देशों की सहायता प्रदान करने का फैसला लिया ! जिनको साम्यवाद से खतरा था।

नाटो संगठन को अमेरिका के राष्ट्रपति हैरी एस ट्रूमैन ने संकलित किया। इस संगठन में सभी देश शामिल हुए जो लोकतंत्र को बचाने पर विश्वास जताते थे जिन्हें साम्यवाद से खतरा था। नाटो के यह निर्णय किया कि इसमें शामिल सभी देशों को सुरक्षा दी जायेगी।

यदि कोई सदस्य किसी देश पर हमला करता है तो वह हमला उस संगठन पर होगा और सब मिलकर उसका सामना करेंगे। तुर्की और ग्रीस को मदद की गयी और साथ ही उन दोनों को नाटो का मेंबर बना दिया गया। इसकी वजह से अमेरिका और सोवियत संघ के बीच बहुत समय तक शीत युद्ध होता रहा।

नाटो (NATO Full Form) के कौन -कौन से उद्देश्य हैं –
1. यूरोप पर आक्रमण के समय सामने डटे रहना।
2. सोवियत संघ के पश्चिम यूरोप में विस्तार को रोकना और युद्ध की स्थिति आने पर लोगों को मानसिक रूप से सहायता प्रदान करना।
3. आर्थिक विकास में अपने कार्यक्रमों के द्वारा यूरोपीय राष्ट्रों को सुरक्षा प्रदान करना।
4. पश्चिम यूरोप के देशों को एक सूत्र में बांधना।
5. नाटों का उद्देश्य स्वतंत्र देश की रक्षा के लिए सभी संभव प्रयास करना !
6. नाटो के सदस्य देश एक दूसरे देशों के बीच सुरक्षा प्रदान करना हैं ।

अधिक जानकारी के लिए NATO की आधिकारिक वेबसाइट पर देखे।

 

FAQ..

NATO का Full Form क्या होता है ?

NATO का फुल फॉर्म North Atlantic Treaty Organization होता है। NATO को हिंदी में उत्तरी अटलाण्टिक सन्धि संगठन कहते है।

NATO क्या है?

NATO एक एक सैन्य गठबन्धन है, जिसमे 28 देशों का सैन्य शक्ति और राजनीतिक का गठबंधन है।

NATO कि स्थापना कब हुई थी ?

NATO कि स्थापना 4 अप्रैल 1949 को हुआ था। जिसका मुख्य उद्देश्य सामूहिक रक्षा करना है। इसका का मुख्यालय बेल्जियम के ब्रुसेल्स में स्थित है।

NATO की स्थापना का उद्देश्य क्या है ?

द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद दुनिया को बहुत ही क्षति उधानी पड़ी थी। जिसमे सोवियत संघ ने अपनी सेना पूर्वी यूरोप से हटाने को मन कर दिया था। और वह पर साम्यवादी की शासन की स्थापना करने की कोशिश की थी।

NATO का इतिहास क्या है ?

विश्व में द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद दो महाशक्ति देश उभर कर आया था। जिसमे एक सोवियत संघ और दूसरा अमेरिका था।
दोनों देशो के बिच शीत युद्ध की स्थिति बन गई थी। सोवियत संघ के साम्यवादी प्रसार को रोकने के लिए अमेरिका ने अपनी चल चली। तो सोवियत संघ ने 1948 में अंतर्राष्ट्रीय संधियों का उल्लंघन कर बर्लिन को चारो तरफ से धेर लिया था।

इसी परिस्थिति के तहत नाटो की स्थापना हुआ जिस संघटन में अपना सेना हो और किसी भी मुकावला में मिलकर रक्षा करे।