RSS Full form in Hindi ! RSS Full Form Kya Hai

In this post you will know what is RSS Full Form. What is RSS Full Form called in Hindi? What is the work of RSS

What is RSS Full Form. RSS Full Form क्या होता है।

RSS का फुल फॉर्म Rashtriya Swayamsevak Sangh होता है ! RSS को हिंदी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कहते हैं !

When was RSS Full Form established? RSS की स्थापना कब हुई थी ?

RSS (RSS Full Form) की स्थापना 27 सितंबर सन 1925 में हुई थी। सन 2014 में इसकी सदस्यता काफी बढ़ गयी थी।इसका उद्देश्य हिंदू अनुशासन के माध्यम से प्रारंभिक प्रेरणा चरित्र प्रशिक्षण देना और हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए हिंदू के समुदायो को एकजुट करना था।

संगठन भारतीय संस्कृति और एक नागरिक समाज के मूल्यों को बनाये रखने के लिए आदर्शों को बढ़ावा देना है और हिंदू समुदाय को मजबूत बनाने के लिए हिदुओ की विचारधारा को फैलाना है।

RSS Full Form = Rashtriya Swayamsevak Sangh

RSS ने द्वितीय विश्व युद्ध में यूरोपीय दक्षिणपंथी समूहों से प्रारंभिक प्रेरणा लेकर इटालियन फ़ासिस्ट पार्टी बनाई जिसका RSS एक प्रमुख हिंदू राष्ट्रवादी संगठन के रूप में विकसित किया गया ! जिसने कई संगठन बने और उन्होंने अपने वैचारिक विश्वासों को फैलाने के लिए कई स्कूलों, संस्थाओं की स्थापना की।

RSS Full form in Hindi ! RSS Kya Hai

RSS (RSS Full Form) को ब्रिटिश शासन काल के दौरान एक बार प्रतिबंधित किया गया ! और कई बार स्वतंत्रता के बाद की भारत सरकार ने पहली बार 1948 में जब नाथूराम गोडसे RSS के एक पूर्व सदस्य ने महात्मा गांधी की हत्या की !

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Hedgewar एक कांग्रेसी हिंदू महासभा के राजनेता थे ! जो नागपुर के सामाजिक कार्यकर्ता BS Munje के राजनीतिक संरक्षक बने। मुंजे ने हेडगेवार को अपनी चिकित्सा की पढ़ाई करने और बंगालियों के गुप्त क्रांतिकारी समाजों से युद्ध करने की तकनीक सीखने के लिए कलकत्ता भेज दिया था। Hedgewar ब्रिटिश सरकार के विरोधी क्रांतिकारी समूह अनुशीलन समिति के सदस्य के पद पर नियुक्त हुए ! इन समाजों के गुप्त तरीकों का इस्तेमाल करके RSS (RSS Full Form) को संगठित किया गया।

Hedgewar जब नागपुर से लौटे तो क्रांति दल की पार्टी ने ब्रिटिश विरोधी गतिविधियों का आयोजन किया और 1918 में स्वतंत्रता कार्यकर्ता तिलक के होम रूल अभियान चलाया। RSS के इतिहास के अनुसार उन्हें क्रांतिकारी गतिविधियों का एहसास होने लगा ! लेकिन तब वह अंग्रेजों को उखाड़ फेंकने में शक्षम नहीं थे।

1923 में नागपुर में प्रकाशित वीडी सावरकर के हिंदुत्व को पढ़ने के लिए 1925 में रत्नागिरी जेल में सावरकर से मिले ! और उनसे मुलाक़ात के बाद हेडगेवार उनसे प्रभावित हुये फिर उन्होंने हिंदू समाज को मजबूत करने को लेकर RSS की स्थापना की।

Hedgewar कहते थे कि इतनी कम जनसंख्या वाले ब्रिटिश भारत के विशाल देश पर शासन करने के लिए वह पूर्ण रूप से सक्षम हैं क्योंकि हिंदू विभाजित हो गए थे ! उनमें साहस की कमी थी और एक नागरिक चरित्र का अभाव भी था। उन्होंने क्रांतिकारी उत्साह के साथ हिंदू युवाओं की भर्ती भी की ! उन्हें काली चारा टोपी, खाकी शर्ट और खाकी शॉर्ट्स की वर्दी दी !

भारतीय शाही पुलिस की वर्दी का मुआयना करते हुए और उन्हें लाठी मारने के साथ अर्धसैनिक की तकनीक तलवार, भाला और खंजर सिखाई। हिंदू समारोहों में संगठन में एक बड़ी भूमिका भी निभाई ! यह धार्मिक पालन के लिए नहीं बल्कि भारत के गौरवशाली लोगो में जागरूकता प्रदान करने और सदस्यों को एक धार्मिक एकता में बांधने के लिए की !

1920 में जब तिलक के निधन हुआ उसके बाद नागपुर में तिलक के अन्य अनुयायियों की तरह, हेडगेवार गांधी ने कुछ कार्यक्रमों का विरोध किया था ! भारतीय मुस्लिम के खिलाफ मुद्दे पर गांधी का रुख हेडगेवार के लिए चिंता का कारण बना ! इसके कारण हेडगेवार अन्य तिलकियों के साथ मिलकर गांधी के साथ अलग हो गये।

1921 में हेडगेवार ने महाराष्ट्र में एक वर्ष के अंदर ही स्वतंत्रता और बहिष्कार जैसे मुद्दों के साथ अपनी बात उठाई। उन्होंने जानबूझकर कई कानून तोड़े , जिसके कारण उन्हें एक साल की कैद भी हो गई ।

जब वह 1922 में रिहा हुए तो रिहा होने के बाद हेडगेवार स्वतंत्रता संग्राम के लिए कांग्रेस के लोगो के बीच संगठित हो गये। जब उन्होंने देखा कि भारत के युवाओं को देश के लिए कभी भी स्वतंत्रता नहीं मिल सकती है। तो इसके बाद उन्होंने देश की परंपराओं और इतिहास पर आधारित एक स्वतंत्र संगठन बनाने की सोची !

1920 में हिंदुओं और मुसलमानों के बीच संबंधों में अच्छी स्थिति नहीं थी। तुर्की में खिलाफत की मांग करते हुए खिलाफत आंदोलन द्वारा मुस्लिम जनता को लामबंद किया गया था, और गांधी जी ने अपने स्वयं के असहयोग आंदोलन का संचालन करने के लिए सहयोग किया। गांधी ने गठबंधन बनाने में हिंदू-मुस्लिम एकता बनाने का लक्ष्य पर जोर दिया।

जब गांधी ने हिंसा के कारण असहयोग आंदोलन को बंद कर दिया, तो मुसलमान उनकी रणनीति से असहमत थे। एक बार जब आंदोलन विफल हो गया, तो जुटाए गए मुसलमानों ने अपना गुस्सा हिंदुओं के प्रति कर दिया। धार्मिक हिंसा की पहली बड़ी घटना कथित तौर पर अगस्त 1921 में मोपला विद्रोह थी ।

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यह व्यापक रूप से रिपोर्ट किया गया था कि मालाबार में हिंदुओं के खिलाफ विद्रोह बड़े पैमाने पर हिंसा में समाप्त हो गया था, जो अंतर-सांप्रदायिक हिंसा का एक रूप था। सिलसिला कई सालों तक चला। भारत 1923 में, नागपुर में दंगे हुए, जिसे हेडगेवार ने मुस्लिम दंगा का नाम दिया जहां हिंदुओं को पूरी तरह से अव्यवस्थित और आतंकित महसूस करना पड़ा। इन घटनाओं ने हेडगेवार पर प्रभाव पड़ा और उन्हें हिंदू समाज को संगठित करने की आवश्यकता पर जोर दिया !

1927 में RSS (RSS Full Form) में 100 से जयादा स्वयंसेवकों प्राप्त करने के बाद हेडगेवार ने इस मुद्दे को मुस्लिम डोमेन में ले लिया। उन्होंने गणेश के लिए एक हिंदू धार्मिक जुलूस का नेतृत्व किया ! संगीत के साथ एक मस्जिद के सामने से गुजरे ! कहा जाता है कि मुसलमानों ने लक्ष्मी पूजा के दिन 4 सितंबर को जवाबी कार्रवाई की। नागपुर के महल में एक हिंदू बारात जब एक मस्जिद में पहुंची तो मुसलमानों ने उसे रोक दिया और बाद में दोपहर को उन्होंने महल में हिंदू आवासों पर हमला कर दिया।

वह RSS (RSS Full Form) कार्यकर्ता पर हमले के लिए तैयार थे और उन्होंने मुस्लिम दंगाइयों को खदेड़ दिया। दंगे कई दिनों तक जारी रहे और फिर सेना को बुलाना पड़ा।

Christophe Jaffrelot हिंदू राष्ट्रवादी आंदोलन जैसे आर्य समाज और हिंदू महासभा के साथ-साथ RSS की विचारधारा में कलंक और अनुकरण के विषय पर चर्चा की। मुसलमानों, ईसाइयों और अंग्रेजों को हिंदू राष्ट्र में प्रत्यारोपित विदेशी निकायों के रूप में माना गया ! जो उन्हें वश में करने के लिए हिंदुओं के बीच वीरता और वीरता की अनुपस्थिति का फायदा उठाने में सक्षम थे।

जैसे अर्धसैनिक संगठन, एकता और राष्ट्रवाद पर जोर। हिंदू राष्ट्रवादियों ने इन अनुकरणीय पहलुओं को हिंदू अतीत से परंपराओं के चुनिंदा उधार के साथ जोड़कर एक ऐसा संश्लेषण प्राप्त किया जो विशिष्ट रूप से भारतीय और हिंदू था।

भारत के सबसे पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने जब से कार्यभार संभाला RSS के लेकर सतर्क थे ! जब गोलवलकर ने नेहरू को पत्र लिखकर गांधी की हत्या के बाद RSS पर प्रतिबंध हटाने के लिए कहा तो नेहरू ने यह जवाब दिया कि सरकार के पास सबूत है कि RSS की गतिविधियां Communist होने के कारण राष्ट्र-विरोधी थीं।

1947 में प्रांतीय सरकारों के प्रमुखों को लिखे अपने पत्र में नेहरू ने लिखा था कि हमारे पास यह दिखाने के लिए बहुत सारे सबूत हैं कि RSS एक ऐसा संगठन है जो एक निजी सेना की प्रकृति में है और जो निश्चित रूप से सबसे सख्त नाजी तर्ज पर आगे बढ़ रहा है।

भारत के सबसे पहले उप प्रधान मंत्री और गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने जनवरी 1948 में कहा था कि RSS के कार्यकर्ता देशभक्त हैं जो अपने देश से प्यार करते हैं। उन्होंने कांग्रेसियों से कहा कि वे RSS को हटाने के बजाय प्यार से जीतें। उन्होंने RSS से विरोध करने के बजाय कांग्रेस में शामिल होने की सलाह दी !

Jafferlot ने कहा कि पटेल की इस बात को आंशिक रूप से RSS (RSS Full Form) द्वारा भारतीय प्रशासन को सितंबर 1947 में सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने में दी गई सहायता से समझाया जायेगा और RSS के प्रति उनकी सहानुभूति की अभिव्यक्ति कई हिंदू परंपरावादियों के लंबे समय से झुकाव को वयक्त करती है।

RSS (RSS Full Form) के स्वयंसेवक द्वारा राहत कार्य :-

RSS ने 2006 में सूरत, गुजरात के लोगों को भोजन, दूध और पीने योग्य पानी जैसी आवश्यकताएं प्रदान करने के लिए राहत प्रयास किये ! जो इस क्षेत्र में बाढ़ से प्रभावित थे। RSS के स्वयंसेवकों ने राहत और पुनर्वास का कार्य किया। बाढ़ के बाद उत्तरी कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे राज्य के कुछ जिलों को प्रभावित किया।

2013 में उत्तराखंड में बाढ़ के बाद RSS (RSS Full Form) के स्वयंसेवक प्रभावित क्षेत्रों में स्थापित अपने कार्यालयों के माध्यम से बाढ़ राहत कार्यों में शामिल थे।

भारत में 2020 को कोरोना वायरस में लॉकडाउन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने लॉकडाउन के दौरान पूरे भारत में कई लोगों को मास्क, साबुन और भोजन सहित आवश्यक सेवाएं प्रदान कीं। 2020 मे जम्मू और कश्मीर की एक मुस्लिम महिला ने अपनी हज यात्रा के लिए 5 लाख, RSS से जुड़े सेवा भारती को दान कर दी, जो तालाबंदी के बीच संगठन द्वारा किए गए कल्याणकारी कार्यों से प्रभावित होने के बाद थी।

आरएसएस की शैक्षिक शाखा विद्या भारती द्वारा चलाए जा रहे स्कूलों में मुस्लिम छात्रों की संख्या में 2017-2020 के तीन वर्षों के दौरान उत्तर प्रदेश में लगभग 30% की वृद्धि देखी गई है।

RSS (RSS Full Form) के दो प्रमुख प्रकाशन हिंदी औरअंग्रेजी में हैं। प्रकाशित पहली पत्रिकाएँ हिंदी और अंग्रेज़ी में थीं। बाद में 1948 में लखनऊ से पांचजन्य, जालंधर से आकाशवाणी और वाराणसी से चेतना जैसे नए प्रकाशन शुरू हुए। 1977 तक प्रकाशन राष्ट्र धर्म प्रकाशन द्वारा प्रकाशित किए जाते थे, जिसकी जिम्मेदारी बाद में भारत प्रकाशन लिमिटेड ने संभाली।

प्रकाशनों का संचालन बोर्ड प्रकाशनों के लिए संपादकों की नियुक्ति करता रहा है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जैसे प्रमुख नेता इन प्रकाशनों के संपादक रहे हैं। 2013 में पांचजन्य की सदस्यता की संख्या लगभग 60000 थी और आयोजक के लिए लगभग 15000 थी।

2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधान मंत्री के रूप में चुनाव के बाद सदस्यता में काफी वृद्धि हुई है। 2017 तक पांचजन्य के 1 लाख से अधिक ग्राहक थे और आयोजक के पास 25000 थे।